Tag: शरद पूर्णिमा

GRINDRA MOHAN JHA

शरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झाशरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 10:29 pm

शरद पूर्णिमा की रात सुहावन, है अति मनभावन, चंद्रमा की चांदनी, उजाला, शीतलता, है अति पावन, चंद्रदेव अमृत-वृष्टि हैं कर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 9:20 pm

विधाता छंदधारित मुक्तक शरद पूर्णिमा कहीं संगम कहीं तीरथ, धरा पर पुण्य बहते हैं, मगर जो आज देखेंगे, कहेंगे व्यर्थ[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

शरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठकशरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठक

0 Comments 8:44 pm

देखो आया शुभद, आज कई संयोग। रजनी लगती नवल, चकवा का हठयोग।। पूनम सुंदर धवल, लेकर आयी रूप। आज पूर्णिमा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें