शोर मचा- वासुदेव छंद गीत सुरभित है सब, कली-कली।शोर मचा अब, गली-गली।। आया मौसम, सर्दी का।पीते हैं पय, हल्दी का।।सर्द हवा जब, चली-चली।शोर मचा अब, गली-गली।।०१।। लगता मनहर, धूप खिला।फूलों…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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