शोर मचा- वासुदेव छंद गीत सुरभित है सब, कली-कली।शोर मचा अब, गली-गली।। आया मौसम, सर्दी का।पीते हैं पय, हल्दी का।।सर्द हवा जब, चली-चली।शोर मचा अब, गली-गली।।०१।। लगता मनहर, धूप खिला।फूलों…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- अश्रु आंखों में लिए-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
- कहे ऋतुराज अपनों से-एस.के.पूनम
- बाल शोषण-राम किशोर पाठक
- अपना लक्ष्य-राम किशोर पाठक
- आमंत्रण पुष्प ब्यूटी कुमारी
- तीसवां दिन जनवरी के रामपाल प्रसाद सिंह
- युवा संकल्प कार्तिक कुमार
- सूर्य रश्मियाँ रामकिशोर पाठक
- स्वतंत्रता की चिंगारी जैनेंद्र प्रसाद
- छा गया मधुमास- रामकिशोर पाठक