हिंदी सबको जोड़ने वाली तेरी तोतली जुबान से तुतलायी हूँ लोरियों संग झूम-झूम तुम्हें मीठी नींद सुलायी हूँ। तेरी किलकारी में मैं ही पुलक-पुलक कर किलकी हूँ। मैं तेरी मातृभाषा…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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