बालहठ माँ ! अब मैं छोटा बालक नहीं मैं तो कुछ कर के दिखलाऊँगा । तुम मुझे धनुष बना कर[...]
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अत्याचार-प्रभात रमणअत्याचार-प्रभात रमण
अत्याचार माता की ममता हार गई हारा पिता का प्यार है भाई का स्नेह भी हार गया बहन तो सर[...]
बेटी-प्रभात रमणबेटी-प्रभात रमण
बेटी बीजों को कोंपल बनने दो कलियों को तोड़ो मत तुम बेटी तो घर की लक्ष्मी है उससे मुँह मोड़ो[...]
राखी-प्रभात रमणराखी-प्रभात रमण
राखी राखी का बंधन ना बंधे तो क्या राखी का त्योहार नही ? है जिस भाई की बहन नहीं क्या[...]
मित्र ऐसा हो-प्रभात रमणमित्र ऐसा हो-प्रभात रमण
मित्र ऐसा हो जीवन में एक मित्र कृष्ण जैसा चाहिए जो संग हो तो जीत निश्चित हो । और मित्र[...]
कैसे-प्रभात रमणकैसे-प्रभात रमण
कैसे माँ भारती के दिव्य रूप को मैं दिवास्वप्न समझूँ कैसे ? इसके परम पूण्य प्रताप को मैं भला भूलूँ[...]
