पद्यपंकज Bhakti कर दे आज करिश्मा- मीरा सिंह “मीरा”

कर दे आज करिश्मा- मीरा सिंह “मीरा”


Meera

माता कर दो एक करिश्मा
मुझको आज उबारो माँ।
नैया डोले बीच भंवर में
मुझको पार उतारो माँ ।।

कबसे तेरी द्वार खड़ी हूँ
एक नज़र तो डालो माँ।
मुझको अपने गले लगाकर
मेरे सब दुख टारो माँ।
कर जोड़ करूँ विनती तुझसे
यह जीवन संवारों माँ —–

देर हुई अब तो आ जाओ
मुझको नहीं सताओ माँ।
नैना तरस रहे दर्शन को
अपनी झलक दिखाओ।।
कब तक बैठी बांट निहारूँ
मुझको सच बतलाओ माँ—–

क्या बतलाऊं माता तुझको
देख रही सारे जग को।
मुश्किल मेरे द्वार खड़ी है
आ जाती माँ तू अब तो।।
हाथ जोड़ कर विनती करती
अब तो द्वार पधारो माँ—-

मीरा सिंह “मीरा”
डुमराँव, बक्सर

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