| मैं शिक्षक हूँ |

स्व-रचित -कविता

मैं शिक्षक हूँ

मैं शिक्षक हूँ,
हाँ मैं शिक्षक हूँ,
राष्ट्र‌ का निर्माता हूँ,
ज्ञान का दाता हूँ,
हां मैं शिक्षक हूँ।
मैं मिट्टी हूँ, पर सोना गढ़‌ता हूँ,
मैं मौन हूँ, पर युगों से बोलता हूँ।
हर बच्चा में खुद को ढालता हूँ,
एक मुस्कान से हर दर्द छुपाता हूँ।
हां मैं शिक्षक हूँ।
मैं दीपक हूँ, अंधकार भगाता हूँ,
खुद जलकर प्रकाश फैलाता हूँ,
हर मन में ज्ञान भरता हूँ,
जीवन को सफल बनाता हूँ,
हाँ मैं शिक्षक हूँ।
ना थकता हूँ ना रुकता हूँ,
हर दिल में बसता हूँ।
ज्ञान का सागर बहाता हूँ,
मैं शिक्षक हूँ, ये गर्व से कहता हूँ,
हां मैं शिक्षक हूँ।

रचयिता- मुन्नी कुमारी
प्रधान शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर मुशहरी

प्रखण्ड- झंझारपुर, मधुबनी

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