शीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरी

निरख सुहानी भोर,
सुखद विहंग शोर,
प्राणवायु का सहर्ष,
अनुभव कीजिए।

ललित प्राची की लाली,
भृंगी बाग मतवाली,
भीनी गंध प्रसूनों की,
तन-मन लीजिए।

कोयल की कूक प्यारी,
लता की शोभा है न्यारी,
मादक बौर आम्र से,
मन न पसीजिए।

सरिता की शुचि धार,
पेड़-पौधों का संसार,
हरियाली भू लाकर,
मन शांति दीजिए।

देव कांत मिश्र’दिव्य’ शिक्षक
मध्य विद्यालय धवलपुरा, सुलतानगंज
भागलपुर, बिहार

2 Likes
Spread the love

Leave a Reply