स्वच्छता का मंत्र
छोटी सी मेरी मुनिया,
न जाने कब हो गई बड़ी।
कई प्रश्न थे उसकी आँखों में,
मैंने समझाया बातों में।
हर किशोरी को आती
ये माहवारी है,
लड़की से नारी बनने की,
ये जैविकीय तैयारी है।
गंदा कपड़ा नहीं लेंगे हम,
साफ सूती कपड़ा,
सैनिटरी पैड है अतिउत्तम।
छह घंटे पर बदलें उसको,
पैड का उचित निपटान करें।
साबुन-पानी से हाथ साफ करें,
रोजाना स्नान करें,
रहे स्वच्छता, न हो संक्रमण।
विद्यालय में अलग शौचालय हो,
माहवारी का उचित प्रबंधन हो।
न झिझकेंगे,न शर्माएंगे,
सब सखियों को भी बताएंगे,
माहवारी स्वच्छता का ये मंत्र,
हर बिटिया तक पहुँचाएंगे।
स्वरचित-संगीता कुमारी सिंह
मध्य विद्यालय गोलाहू
नाथनगर,भागलपुर,
बिहार
SANGITA KUMARI SINGH


