प्रकृति हो व्याकुल मन की; व्यथित क्षुधा तुम, अमृत तुल्य; नीर सुधा तुम।। हे प्रकृति रुपी; ममता मयी, तू सदा[...]
Day: August 4, 2020
जल की बूंदें-स्वाति सौरभजल की बूंदें-स्वाति सौरभ
जल की बूंदे मचल रही थी जमीं से ही, उठने को ऊपर की ओर राह देख रही थी सूरज का,[...]
डरो मत तुम कोरोना भगाओ-मनु कुमारीडरो मत तुम कोरोना भगाओ-मनु कुमारी
डरो मत तुम कोरोना भगाओ सखी सहेली भाई बहना, कोरोना से तुम यूँ डरो ना , भले ना बनी कोई[...]
गाँधी को गढ़ना होगा-स्नेहलता द्विवेदी आर्यागाँधी को गढ़ना होगा-स्नेहलता द्विवेदी आर्या
गाँधी को गढ़ना होगा मानवता के मनोभाव को निर्मल से करने के लिए, मधुर जीवन के सरस भाव को अमृतमय[...]
श्री गुरु महिमा-शुकदेव पाठकश्री गुरु महिमा-शुकदेव पाठक
श्री गुरु महिमा गुरु आत्मा, गुरु परमात्मा गुरु है ओम्, गुरु ही व्योम गुरु निवारण, गुरु जगतारण गुरु का सम्मान[...]
विवसता-रुचि सिन्हाविवसता-रुचि सिन्हा
विवशता प्रकृति ने गजब रौद्र रूप अपनाई है , एक तरफ है कुंआ तो दूसरी तरफ खाई है । हे[...]
