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पौधे सुंदर लहराते हैं- प्रणव छंद गीत वर्णिक
पौधे सुंदर लहराते हैं।
मेघों का जल यह लाते हैं।।
प्राणी भोजन इनसे पाते।
छाया दे हम-सबको भाते।।
फूलों से जब भर जाते हैं।
पौधे सुंदर लहराते हैं।।०३।।
जीवों का सुरभित डेरा हूँ।
पक्षी का सहज बसेरा हूँ।।
सारे ही तरुवर गाते हैं।
पौधे सुंदर लहराते हैं।।०३।।
देते वायु सहज साँसों को।
लेते हैं हर विष फाँसों को।।
देवों सा नित इठलाते हैं।
पौधे सुंदर लहराते हैं।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

