विश्वनाथ मम नाथ मुरारी। त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी।। कौशल्या नंदन बन रघुकुल आये, नीर निधि के बीच द्वारिका बसाये, कोई[...]
विश्वनाथ मम नाथ मुरारी। त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी।। कौशल्या नंदन बन रघुकुल आये, नीर निधि के बीच द्वारिका बसाये, कोई[...]