Author: madhukumari

Dhiraj Kumar

मन का रावण कब मारोगे?- धीरज कुमारमन का रावण कब मारोगे?- धीरज कुमार

0 Comments 12:29 pm

वो रावण था, क्योंकि वसुधा को शापित कर अधिकार किया। गंधर्व, यक्ष पर क्या कहना, देवों पर अत्याचार किया। वो[...]

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Umesh kumar sinha

आइए, हनुमान जी का ध्यान धरें -उमेश कुमार सिन्हा ‘ निर्देशक ‘आइए, हनुमान जी का ध्यान धरें -उमेश कुमार सिन्हा ‘ निर्देशक ‘

0 Comments 12:22 pm

श्रीराम के अनन्य सेवक हनुमान ! आइए, हम हनुमान का ध्यान धरें, नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद माँगें। बल, बुद्धि, विद्या[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

शब्द-शिल्प: वाक्य भेद-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर शब्द-शिल्प: वाक्य भेद-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

0 Comments 12:19 pm

पदों के सार्थक मेल से, ‘वाक्य’ जनम लेता है, भावों और विचारों को, जो पूर्ण रूप देता है। इसके भेदों[...]

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शब्द के आठ भेद -कार्तिक कुमार शब्द के आठ भेद -कार्तिक कुमार 

0 Comments 12:10 pm

आओ बच्चों! ज्ञान बढ़ाएँ, कविता गाकर भेद बताएँ। संज्ञा नाम बताती है, राम-श्याम की पहचान कराती है। सर्वनाम संज्ञा की[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

सामर्थ्य-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरसामर्थ्य-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 12:05 pm

शारीरिक ढांचा नारी का, पर भीतर तेज पुरानी है, विजयादशमी का पर्व कहे, वह साक्षात भवानी है। दिखते नहीं हैं[...]

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Punam Kumari

स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत: स्वच्छता से ही सुंदरता-पुनम कुमारीस्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत: स्वच्छता से ही सुंदरता-पुनम कुमारी

0 Comments 3:15 pm

स्वच्छता का दीप जलाएँ, भारत को सुंदर बनाएँ। गली-गली और गाँव-गाँव में, स्वच्छता का अलख जगाएँ॥ न गंदगी हम फैलाएँगे,[...]

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Punam Kumari

स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन-पुनम कुमारीस्वस्थ जीवन, सुखी जीवन-पुनम कुमारी

0 Comments 3:08 pm

स्वस्थ तन में स्वस्थ मन का, होता सुंदर वास। स्वास्थ्य रहे तो जीवन में, जगती नई मिठास॥ सुबह-सुबह जब सूरज[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

उलझन सुलझाएं -धर्मेंद्र कुमार ठाकुरउलझन सुलझाएं -धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 1:45 pm

गणित की दो धाराएँ: ल.स. और म.स. गणित नगर के दो हैं भाई, दोनों ने अद्भुत महिमा पाई। एक ढूँढता[...]

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Mritunjay Kumar

पेड़ लगाएँ, प्रकृति को हरा-भरा बनाएँ -मृत्युंजय कुमारपेड़ लगाएँ, प्रकृति को हरा-भरा बनाएँ -मृत्युंजय कुमार

0 Comments 1:39 pm

आओ, हम सब पेड़ लगाएँ, प्रकृति को हरा-भरा बनाएँ। हरियाली फैलाएँगे, पर्यावरण को स्वच्छ बनाएँगे। एक-एक पेड़ लगाना है, धरती[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

अद्भुत कारखाना – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर अद्भुत कारखाना – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर 

0 Comments 1:31 pm

  है उलझन बड़ी विकराल, समझ न पाया इसको कोई, इस छोटे से पेट में देखो, कैसी जादूगरी है सोई।[...]

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