होली- मनोज कुमार-पद्यपंकज

होली- मनोज कुमार

Manoj (Vaishali)

🪂होली
ना कहीं पे गम है,
सम भाव सबरंग है;
हरिभजन का दम है,
तो ढोल-नाल का बम है।

👻होली
मालपुआ मदमस्त है,
दही बड़ा दिलकश है;
ड्राई फ्रूट्स भी संग है,
तो भांग-मदिरा टंच है।

🌈होली
राग-रंग अबीर है,
चाहु – ओर रंगीन है;
मौसम लागे हसीन है,
तो गाद-गाली का सीन है।

🎉होली
आम्र मंजर मादक है,
दो दिलों की हसरत है;
तन-तरस की तरकस है,
तो ताव-दिखाओ की कसरत है।

👹होली
नैतिकता में नर्मी है
दिखाने की गर्मी है
गलती लागे अच्छी है
पर सीमा रेखा बंदी है।

🪷होली
रस-रास का खेला है
बरसाना में मेला है
कन्हैया का बृजभूमि है
पर राधे-राधे कहना है।

🔥होली
प्रह्लाद की मुक्ति है,
देव दानव की पुष्टि है;
पालनहार श्री विष्णु है,
तो काल कोप हिरण्यकशिपु है।

🌾होली
धरती पुत्र धन्य है,
अन्न-कण से तन है;
तावर तोड़ मृदंग है,
तो चीर-फार हुड़दंग है।

👩‍💻होली
किसानी का जन्नत था,
रौनक लाने का मन्नत था ;
अब एक्जाम का प्रेशर है,
नौजवानों का टेंशन है।

🎊🎊🎊🎊🎊
रंग भरे पिचकारी से
ना उड़े उस लाली से
होली की हार्दिक शुभकामनाएं
🎉🎉🎉🎉🎉

मनोज कुमार
सहायक शिक्षक रा.आ.चौ.उ.म.वि.धानेगोरौल प्रखंड गोरौल जिला वैशाली

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