सुहानी सुबह- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

सुहानी सुबह बागों में बहार आई, खिल गई अमराई, हरे-हरे नए पत्ते, डालियों में हिलते। भोर लिया अंगड़ाई, सुहानी सुबह आई, भाँति-भाँति पुष्प दल, चमन में खिलते। दलहन तेलहन, फसलें…

कोरोना काल की व्यथा- नीतू रानी

कोरोना काल की व्यथा साधारण वर्ग की व्यथा परेशानी और महंगाई पर आधारित स्वरचित गीत। शीर्षक- कोरोना काल की व्यथा जहिया सेअ एलअ सुख चैन छीनलेए रे कोरोनमा जहिया से…

मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

🙏कृष्णाय नमः🙏 विद्या:-मनहरण घनाक्षरी काव्य पथ पर चला, अक्षरों को जोड़-जोड़, प्रेम गीत लिख दिया,शब्दों को सजाइके। विचारों में डूब कर, तूलिका पकड़ कर, थमा नहीं,रुका नहीं,भावों को जगाइके। दिवा…

बचपन की नादानी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

कुछ शरारतें और नादानी याद जाती अपनी शैतानी, कभी सोचकर शर्म के मारे आ जाता आंखों में पानी। धमाचौकड़ी खूब थे करते गिरने पर आहें थे भरते, भैया,पापा,चाचा के अलावे…

चलना है थोड़े -थोड़े- धीरज कुमार

हैं पग- पग पर रोड़े। चलते रहना है थोड़े -थोड़े।। बढ़ते कदम अब रुकने वाले नहीं है। इरादे मजबूत रखे चले कितने भी कोड़े।। है बुलंद इच्छाशक्ति पत्थर सी। चला…