बचपन की नादानी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

कुछ शरारतें और नादानी याद जाती अपनी शैतानी, कभी सोचकर शर्म के मारे आ जाता आंखों में पानी। धमाचौकड़ी खूब थे करते गिरने पर आहें थे भरते, भैया,पापा,चाचा के अलावे…

चलना है थोड़े -थोड़े- धीरज कुमार

हैं पग- पग पर रोड़े। चलते रहना है थोड़े -थोड़े।। बढ़ते कदम अब रुकने वाले नहीं है। इरादे मजबूत रखे चले कितने भी कोड़े।। है बुलंद इच्छाशक्ति पत्थर सी। चला…

मैं बिहार हूं- एम० एस० हुसैन

बाल्मीकि का मैं रामायण हूं एस० एच० बिहारी मैं गायन हूं बहादुर और बिस्मिल्लाह की वाद्य यंत्रों का सदा मैं वादन हूं पटना हुआ मेरा हृदय स्थली मैं ही भारत…

बिहार दिवस- नीतू रानी

आओ बच्चों आओ बिहार दिवस मनाएँ, नाचो झूमो गाओ खुशियों का दीप जलाएँ। आओ बच्चों———२। आओ जाने बिहार का नाम बिहार कैसे पड़ा भगवान बुद्ध के शिष्य बिहार करने निकले…

सुंदर छै अपनो बिहार- डॉ स्वराक्षी स्वरा

सुंदर छै अपनो बिहार, बिहार मोरी सखिया गांव-गांव गली-गली स्कूल खुलल छै सगरो छै शिक्षा उजार उजार मोरी सखीया सुंदर छै…. महिला पुरुष यहां एके समान छै महिला बनल सरकार…

बिहार गाथा- एस.के.पूनम

वो कौन- सी है धरा, बहती जहाँ निर्मल नीर, जटा शिव से निकल, कलकल बहती सदा, वो मोक्षदायिनी गंगा, पोषण करती बिहार धरा। चाणक्य की है कर्मभूमि, बुद्ध की है…