शैशव, बाल्य, किशोर, युवा,से होकर तुम बने हो वृद्ध,तुम्हारा असली,बड़ा गुण है,हर स्थिति में स्थिर औ’ सिद्ध,ज्ञान, विज्ञान, अनुभव में[...]
Author: PRIYANKA PRIYA
मां भगवती – राहुल कुमार रंजनमां भगवती – राहुल कुमार रंजन
मां भगवती! शक्ति का सागर,तेरे चरणों में है जग सारा।भक्त तेरे गुण गाते हरदम,तू है सबकी नैया का किनारा। रक्तचरण[...]
लिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनमलिखी हूं प्रेम पाती प्रिय- एस के पूनम
विधाता छंद। विधान-1222*4(लिखी हूँ प्रेम पाती प्रिय)(1)गगन हो या धरा पर हो,तुम्हें सत्कार जन-जन में। तुम्हीं को देख जीती हूँ,प्रणय[...]
माता की सवारी – जैनेन्द्र प्रसाद रविमाता की सवारी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद आश्विन पावन मास,नवरात्र होता खास,इस बार माता जी की, हाथी की सवारी है। श्रद्धा रख नर नारी-सामग्री[...]
मां आ जाओ- रुचिकामां आ जाओ- रुचिका
हर उलझन कैसे सुलझेयह राह हमें दिखलाओ।आओ माँ मेरे जीवन सेकष्ट सारे तुम हर ले जाओ। तुम्हारे आने से आत्मबल[...]
ऐ जिन्दगी तेरे लिए – डॉ पूनम कुमारीऐ जिन्दगी तेरे लिए – डॉ पूनम कुमारी
ए ज़िन्दगी तेरे लिए क्या क्या करना रह गया बाक़ी,बस इतना बता दे ज़िन्दगी बहुत भटक लिया गुमनामी मेंए जिंदगी[...]
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानशीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी।रोला कैसा है लावण्य, रूपसी नाजुक नारी।कोमल पीपल पात,सरीखे डिगती डारी।।जो जाते उस राह,भनक लेते[...]
सरहद पे खड़े हैं जज्बा लेकर- बिंदु अग्रवालसरहद पे खड़े हैं जज्बा लेकर- बिंदु अग्रवाल
सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का।देश की आन पे करते[...]
पितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदीपितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदी
पितृ पक्ष के भाव जिनमें है पिता की भक्ति ,वही तो पितृ तर्पण करते ।अपने उर में श्रद्धा लेकर ,वही [...]
जाति वर्ण – गिरींद्र मोहन झाजाति वर्ण – गिरींद्र मोहन झा
भिन्न-भिन्न जाति, सम्प्रदाय,भिन्न-भिन्न वर्ण और समुदाय,भाषा, राज्य, प्रांत और वतन,भिन्नता सबमें, पर है एक धरम,भिन्न-भिन्न भले सबकुछ, सब असमान,पर एक[...]
