आस्था न होगा कभी दूजा, ये है हमारा छठ का पूजा।व्रतियों ने खुद को इस तप में भूंजा, इसलिए आज[...]
Author: PRIYANKA PRIYA
क्या तुमने कभी देखा है – अवनीश कुमारक्या तुमने कभी देखा है – अवनीश कुमार
(मानवता के आईने में झाँकती एक कविता) क्या तुमने कभी देखा है…बेबस, लाचार हर उस औरत कोजो ढो रही है[...]
अरघ केरऽ बेरिया नु हो- राम किशोर पाठकअरघ केरऽ बेरिया नु हो- राम किशोर पाठक
अरघ केरऽ बेरिया नु हो – छठ गीत कर जोड़ी करिले विनतिया सुनह सुरुज बतिया नु हो।आदित करूँ नहीं देरिया[...]
प्यारा स्कूल – निवेदिता कुमारीप्यारा स्कूल – निवेदिता कुमारी
प्यारा स्कूल मैं ये कहाँ आ गई हूँ,ये सवाल मन में आया है,माँ के साथ जब पहली बार,अनोखे जगह पर[...]
समस्या – बैकुंठ बिहारीसमस्या – बैकुंठ बिहारी
समस्याजीवन का अभिन्न अंग है समस्या,सुख का साथी है समस्या,दुख का साथी है समस्या,भूत का साथी है समस्या,वर्तमान का साथी[...]
मां की लाल साड़ी – अवधेश कुमारमां की लाल साड़ी – अवधेश कुमार
माँ की लाल साड़ीअलमारी के कोने में अब भी टंगी है वो लाल साड़ी,जिसमें बसती है माँ की मुस्कान —[...]
पानी – गिरींद्र मोहन झापानी – गिरींद्र मोहन झा
पानी तू रंगहीन होती, फिर भी तेरे रंग अनेक,श्रेष्ठ विलायक बनकर तू कितनों को करती एक,आंखों का पानी, हो सबके[...]
रामायण पढ़ते हैं – राम किशोर पाठकरामायण पढ़ते हैं – राम किशोर पाठक
गीतआओ चिंतन कर लें थोड़ा, जो खुद गढ़ते हैं।गाथा सुंदर रामायण की, हम-सब पढ़ते हैं।। आओ चिंतन कर लें थोड़ा,[...]
मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमारमेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार
मेरी पोषण वाली थाली : बाल कवितामाँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग ,पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग[...]
कैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारीकैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारी
कैसे कह दूंकैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सी बेचैनी है।कैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सा अधूरापन[...]
