जिंदगी -सूर घनाक्षरी एक रास्ता है जिंदगी,आओ कर लें बंदगी,त्याग चित की गंदगी, चलते जाइए।कर्म धर्म मर्म ज्ञान,अपना पराया जान,सबको समान मान, समता लाइए।धैर्य धारिए मगर,स्नेह वारिए अगर,सौम्य बोलिए बसर,…
Author: PRIYANKA PRIYA
बिन मौसम बरसात – अवधेश कुमार
बिन मौसम बरसात : बाल कविता , मौसम आजकलहथिया नक्षत्र की बिन मौसम बरसात आया ,अपने साथ लाया बाढ़ और ढंडक की छाँव,घिर गई बदरिया छाई बैचैनी गाँव में ।धरती…
चाचा का कोजगरा – अवधेश कुमार
चाचा का कोजगरा : –शरद पूर्णिमा की चाँदनी छम-छम बरसे,आँगन हो उजियार,खुशियों की झिलमिल करती, उल्लास भरे त्यौहार।माँ के थाल में मखान सजे, संग जलेबियाँ गोल,मीठी खुशबू उड़ती जाए, मन…
मैं कैसे हार मान लूंँ – राम किशोर पाठक
मैं कैसे हार मान लूँ- गीत (अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर ) आओ नयी पहचान लूँमैं कैसे हार मान लूँ। शिक्षक का कर्म लिया हूॅंशिक्षा का धर्म लिया हूॅंआओ नयी परिधान…
एक ही ईश्वर की संतान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
(मनहरण घनाक्षरी छंद में) भाग-१सभी लोग खाते अन्न,एक जैसा होता तन,एक ही तो जल पीते, हिंदू मुसलमां हैं। सभी स्वांस लेते हवा,जीवन जीने की दवा,रहने को एक ही तो, जमीं…
उत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठक
उत्पाती वर्षा वर्षा रानी क्रुद्ध हो, करती है उत्पात।इंद्र साथ भी दे रहे, कर भीषण वज्रपात।। बाहर खतरा है घना, छिपकर रहते लोग।वही लाचार विवश हो, करते कुछ उद्योग।। हान…
बाल प्रेरक व्यक्तित्व – राष्ट्रपिता गांधी जी एवं शास्त्री जी – अवधेश कुमार
बाल प्रेरक व्यक्तित्व : राष्ट्रपिता गाँधी जी और शास्त्री जीचरखा वाले बापू प्यारे,सत्य-अहिंसा की राह दिखाए।सादगी जिसने सिखलाई,सबको प्रेम-भाव अपनाए। शास्त्री जी थे कर्मयोगी,जय जवान-जय किसान का दिया नारा।सीधी सच्ची…
देवदूत – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
देवदूत(मनहरण घनाक्षरी छंद में)††††भाग-१देवदूत बनकर,लिया जब अवतार,वन गिरी जमीं संग, झूमा था गगन है। खुद जो गरल पीया,दूसरों के लिए जीया,ऐसे महा मानव को, दिल से नमन है। ‘पुतली’ के…
रघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य रघुनंदन का है शिकार। हर दिशा निशा लो गईं जाग।सबके होंठों पर एक राग।।रावण का करना आज दाह।घर जाते करना वाह-वाह।।…
गुरुद्वार-मैं जाऊंगी बार-बार – नीतू रानी
विषय -गुरुद्वार।शीर्षक -मैं जाउँगी बार -बार। मेरा सबकुछ है गुरुद्वार,मैं जाउंँगी बार- बार। मेरे माता-पिता गुरु हैंमेरे बंधु सखा गुरु,मेरे गुरु जी लगाएँगे बेरापारमैं जाउंँगी बार- बार।मेरा सबकुछ ——-२। मेरे…