सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक 

सर्दी – कहमुकरी स्पर्श सदा कंपित है करती। रोम-रोम में सिहरन भरती।। जैसे वह हमसे बेदर्दी। क्या सखि? साजन! न सखी! सर्दी।।०१।। कभी डरूँ तो छुप मैं जाऊँ। दिन-भर जमकर…

मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार

माँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग , पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग । मोटे अनाज देंगे हमें बल, गेहूँ, चावल भरें संबल। दाल हमें दे प्रोटीन प्यारा,…

बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद- राम किशोर पाठक

बाल सपने – सार्द्ध मनोरम छंद पाँव में पाजेब मनहर बाँध अपने। नाचते हैं श्याम बनकर बाल सपने।। देखकर नंगे कदम के दाँव प्यारे। झूमता है मन मयूरा भी हमारे।।…

सपने को साकार करें हम – अमरनाथ त्रिवेदी

सपने को साकार करें हम गलत बातों में कभी  नहीं पड़ेंगे, अपने  सपने को  साकार करेंगे । हर पल चिता छोड़ हम चिंतन को ध्याएँ , हर  मुश्किल  से चिंतन…

बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद – राम किशोर पाठक

बचपन अपना – प्रहरणकलिका छंद हरपल सबसे मिलकर कहते। हम-सब अपने बनकर रहते।। बरबस कुछ भी कब हम करते। सुरभित तन से मन सब हरते।। बचपन अपना अभिनय करता। बरबस…