जब थककर बैठ गए थे हम, और लगा — अब आगे क्या? तब किसी ने धीरे से आकर कहा — “चलो, अभी रास्ता है बचा।” एस० एल० डी० से जूझते…
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सुर्योदय-नीभा सिंह
सूर्योदय आज कल सुबह उठते ही कोई भागम भाग का तनाव नहीं, फूलों संग, घर संग, सभी स्थानों में एक सम्मोहन सा जगा है। ना जाने यह कैसा सूर्योदय हुआ…