कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक

कैसे आए शांति- सरसी छंद गीत गद्दारों की फौज खड़ी हैं, जो फैलाती भ्रांति। विकट समस्या आज जगत् की, आए कैसे शांति।। सभी जहाँ हैं सीना तानें, बनता खुद सिरमौर।…

बीत गया फागुन माह- रामकिशोर पाठक

चैत्र- राधिका छंद गीत बीत गया फागुन माह, चैत है आया। महुआ का मादक गंध, प्रीत भर लाया।। नूतन आता है वर्ष, लता हर्षाती। शीत उष्ण मिलकर संग, फूर्ति है…

यही है सार जीवन का -एस. के. पूनम

विधा:-विधाता छंद। (यही है सार जीवन का) यहाँ सीखा, रहो मिलकर, न जीओ तुम, निराशा में। पढ़ी सरगम, उमंगों की, न घबराया, हताशा में।। कभी मुड़कर,न देखा प्रिय, जिसे मैं…

आज की नारी -रुचिका

आज की नारी अपने घावों से खुद ही उबरती, संघर्ष की जमीन पर एक नई पटकथा लिखती है वह आज की नारी जो नित नए आयाम को गढ़ती। दोहरी जिम्मेदारी…

दहलीज -रुचिका

दहलीज हर बार वह सोचती की अब नही, मगर कदम उसके ठहर जाते थे घर की दहलीज पर घुटती रहती थी मगर हिम्मत नही जुटा पाती थी की छू ले…

नारी शक्ति – मुन्नी कुमारी

नारी-शक्ति स्व-रचित-कविता नारी की शक्ति अपार, नारी की महिमा अपरम्पार। नारी में गुणों का भंडार, नारी में ममता की बहार। कभी माँ की ममता बहाती, कभी बहन बन प्यार लुटाती।…

तुम कौन हो?-डॉ स्नेहलता द्विवेदी

तुम कौन हो? उसने पूछा, आखिर कौन हो तुम?, उर्वशी मेनका ,इंद्राणी, या अपाला लोपा घोषमुद्रा! यशोदा , राधा रुक्मिणी सीता, या कुंती द्रौपदी! आखिर कौन हो तुम? आग में…

रंगों का त्यौहार -मनु कुमारी

रंगों का त्योहार होली है रंगों का त्योहार , रंगों से रंगा सारा संसार l गुलाल की महक संग रिश्तों का प्यार, मिले सबको सचमुच खुशियां अपार। नफ़रत, ईर्ष्या, द्वेष,…

होली का त्यौहार -नीतू रानी

व शीर्षक-होली का त्योहार होली है हिन्दुओं का त्योहार लोग लगाते हैं एक-दूसरे के गालों में रंग गुलाल, खाते हैं सब पुआ और खीर गाते हैं जोगीरा सारा रा रा।…