गर्मी आई -नीतू रानी

विषय -गर्मी आई। शीर्षक -झटपट भागा ठंडा भाई। झटपट भागा ठंडा भाई, लेके कंबल और रजाई। स्वेटर पहनकर जैसे- तैसे भागा , जैसे उड़ता काला कागा। छोड़ गया वह पतला…

सामाजिक न्याय _रामकिशोर पाठक

सामाजिक न्याय- दोहा छंद गीत न्याय शब्द ही गूढ़ है, कैसे करें बखान। पाना सब हैं चाहते, मुश्किल होना मान।। समता इसका मूल है, बड़ा कठिन सा कार्य। स्वार्थ रहित…

लिखनी एक कहानी होगी- रामकिशोर पाठक

२२-२२-२२-२२ लिखनी एक कहानी होगी लिखनी एक कहानी होगी। जिसमें खास रवानी होगी।। उसने आँचल है लहराई। चढ़ती मस्त जवानी होगी।। उसके गोरे गालों पर अब। कुमकुम भी मस्तानी होगी।।…

प्रभाती पुष्प जैनेंद्र प्रसाद

प्रभाती पुष्प सीता स्वयंवर जनक दुलारी सीता, साध्वी परम पुनीता, दुल्हन बन कर अवधपुरी आई है। धनुष जो हुआ भंग, देख लोग हुए दंग, घर-घर मिथिला में, बजी शहनाई है।…

बाल कविता नीतू रानी

विषय -बाल कविता। शीर्षक -सोमवार को आएगा मेरा मोटरकार। सोमवार सोमवार सोमवार, सोमवार को आएगा मेरा मोटरकार। मंगलवार मंगलवार मंगलवार, माँ करती बच्चों से बेइंतहा प्यार। बुधवार बुधवार बुधवार, मलाई…

बसंत -डॉ अजय कुमार

बसंत आम के पेड़ पर छाए बौड़़ चर- अचर नाचें चहूँ ओर सुरभित भए दिग- दिगंत सखि, यही तो है बसंत! रे अलि! आया बसंत! सिसिर का सुनापन है भागा…

दोहे रामकिशोर पाठक

दोहे सकल सृष्टि में कर्म के, फल का बना विधान। जिसका पालन का सदा, रखते शनि हैं ध्यान।। जिसने जैसा है किया, उसे वही हो प्राप्त। न्याय व्यवस्था शनि किए,…

आकाश बाल कविता -रामकिशोर पाठक

आकाश- बाल कविता अम्मा कहती हैं मुझे, छूना है आकाश। मेरे सारे कार्य पर, देती है शाबाश।। हर्षित होकर मैं सदा, करता अपना काम। मीठी बोली से सदा, माँ लेती…

बगुला नीतू रानी

विषय -बगुला। शीर्षक -आटा से बना मेरा बगुला। आटा से बना ये बगुला, देखने में लंबा और पतला। दिन भर देखता रहता पानी, खाता रहता मछली रानी। घर इसका बरगद,…