सदा कर्मनिष्ठ, सच्चरित्र, आत्मनिर्भर बनो तुम, जिस काम को करो तुम, उससे प्रेम करो तुम। नित नई ऊँचाई छूकर, सदा[...]
स्वर्ग और नर्क की कल्पना – नीतू रानीस्वर्ग और नर्क की कल्पना – नीतू रानी
स्वर्ग नरक कहीं और नहीं है इसी पृथ्वी पर सब। जरा सोचिए बैठकर, समय मिले एक पल तब।। इसी पृथ्वी[...]
कभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रविकभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
रूप घनाक्षरी छंद तूफानों में नाव डोले, कभी खाए हिचकोले, धारा बीच माँझी चले, थाम कर पतवार। अवसर आने पर,[...]
स्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानीस्वर्ग नर्क कहीं और नहीं- नीतू रानी
स्वर्ग नरक कहीं और नहीं है इसी पृथ्वी पर सब, बैठके थोड़ा सोचिए जब समय मिलता है तब। इसी पृथ्वी[...]
भारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झाभारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झा
वेद-वेदान्त की है उक्ति यही, सदा बनो निर्भीक, कहो सोsहं , उपनिषद कहते हैं, ‘तत्त्वमसि’, तुम में ही है ‘ब्रह्म’,[...]
सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा
सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]
हरियाली विकसाएँ हम- रत्ना प्रियाहरियाली विकसाएँ हम- रत्ना प्रिया
सूरज के प्रचण्ड ताप से , अब नहीं कुम्हलाएँ हम । आओ करें श्रृंगार धरा का, हरियाली विकसाएँ हम ॥[...]
योग दिवस मनाये-कंचन सिंहयोग दिवस मनाये-कंचन सिंह
#मैं-हूं-योगदूत #Iam yogdoot आओ बच्चों योग करें हम, मिलजुल कर यह प्रयोग करें हम, योग है एक ऐसा सोपान, जिसको[...]
मृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झामृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झा
मृत्यु अटल है, शरीर की, मरण असम्भव, जमीर की, मृत्यु यदि मिले सुमृत्यु तो, देश हित, लोक हित में हो,[...]
