सीखना जीना जैसे सतत अविरल चलते रहना सबक यह पूरा नहीं होता यह रास्ते खत्म नहीं होते कभी यही सौंदर्य अद्वितीयता भी यही अधूरा और पूरे के बीच की समतल और…
पथिक-दिलीप कुमार गुप्त
पथिक कंटक निर्जन राह से बचकर निष्कंटक मार्ग चलना होगा असत्य की भीड़ से पृथक सत्य संबल अपनाना होगा। पथिक! जीवन पथ सुगम होगा। अपेक्षाओं से दूर निकल कर वर्जनाओं…
यादों का वातायन-दिलीप कुमार चौधरी
यादों का वातायन जब आता है आम का मौसम याद आता है मुझे अपना गाँव। हरे-भरे, सुहाने खेत-खलिहान और पेड़ों की वो घनेरी छाँव। यादों के वातायन से आज झाँक…
मोबाईल की दुनियां-सुरेश कुमार गौरव
मोबाईल की दुनियां कल तक अपनी कलम से, लिखावट की बाते थीं! डाक से अपनों को पत्रादि, भेजने की आदतें थीं!! अब जब इस मोबाइल तीव्रतम का, आया जमाना! नई…
कागज़ की आत्मकथा-एस. के. पूनम
कागज़ की आत्मकथा मेरा जन्मभूमि चीन कहलाता है, मुझे माह, तारीख तो याद नहीं है, पर हाँ! वर्ष 201 ई.पू. अंकित है, त्साई-लुन मेरे जनक कहलाते हैं। मैं वृक्षों के…
प्रार्थना-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रार्थना स्वर की देवी माँ सरस्वती वाणी मधुरिम कर देना। भक्ति भाव से आया हूँ मैं गीतों में रस, भर देना।। भाव पुष्प माँ लेकर आया और क्या माँ, चढ़ाऊँ…
जोड़ घटाव-बीनू मिश्रा
जोड़-घटाव आओ मिल कर खेले खेल, क्या होता है करके मेल, मेरे पास थे डिब्बे दो, और दो दे गया वो, अब कितने हुए अब हो गए डिब्बे चार, उसमें रखे…
पिता-गिरिधर कुमार
पिता एक बरगद एक असीम सा कुछ वह खड़ा है पार्श्व में हम और हमारी छाया के बीच कहीं… ढूंढो न ढूंढो उसे कोई मतलब नहीं बस तुम्हारी समृद्धि चाहिए…
पिता का चरित्र-भोला प्रसाद शर्मा
पिता का चरित्र एक रिश्ता है वो प्यार का, रहकर भी साथ निभा जाते हैं। होंठो पर दिखा मुस्कान वह हरदम, दिलों पर बोझ सहन कर जाते हैं। पता ही…
गाँव-मुकेश कुमार
गाँव गाॅंव की पगडंडियों में एक अलग बात है, यहाँ हमेशा हरियाली ही साथ है, एक बार गाँव आकर घूम लीजिये, यहाँ प्यार, स्नेह, सम्मान की बरसात है। यहाँ आपको…