पंछी-अशोक कुमार

पंछी हम पंछी स्वतंत्र रूप में, बंद पिंजरे में न रह पाएंगे। कभी चहकना कभी फुदकना, गुलामी की दास्तां स्वीकार नहीं।। खुले में रहना स्वच्छ वातावरण में, दाना चुगने दूर…

प्रकृति की छवि-डाॅ. अनुपमा श्रीवास्तव

प्रकृति की छवि बसाके अपनी आँखो में तेरी अदभुत छटा निहार रही मन उपवन बन पुकार उठी प्रकृति की देख शृंगार सखी। तेरे हृदय के गहरे सागर में हंसो का…

दिलों को दिलों से जोड़ें-अर्चना गुप्ता

दिलों को दिलों से जोड़ें दिलों से दिलों को जोड़े हम मीत गुनगुना लें मिल एक मधुर संगीत जीवन सरिता एक निधि अमूल्य एकदूजे संग सदा ही निभाएँ प्रीत अब…

पानी की बर्बादी रोको-विजय सिंह नीलकण्ठ

पानी की बर्बादी रोको पानी की बर्बादी रोको बर्बाद करे जो उसको टोको जल स्रोतों को ध्यान से देखो कूड़े कचरे न इसमें फेंको। जल से ही जीवन संभव है…

भिक्षुक-रीना कुमारी

भिक्षुक देखो बच्चो भिक्षुक आया, दरवाजा उसने खटखटाया, मैले-कूचे कपडों में आया, मनही मन जैसे भरमाया, सब दिखाये उसपर माया, देखो बच्चो भिक्षुक आया। झोली उसकी फटी-चिटी, आँखें उसकी धसी-धसी,…