पंछी हम पंछी स्वतंत्र रूप में, बंद पिंजरे में न रह पाएंगे। कभी चहकना कभी फुदकना, गुलामी की दास्तां स्वीकार नहीं।। खुले में रहना स्वच्छ वातावरण में, दाना चुगने दूर…
प्रकृति की छवि-डाॅ. अनुपमा श्रीवास्तव
प्रकृति की छवि बसाके अपनी आँखो में तेरी अदभुत छटा निहार रही मन उपवन बन पुकार उठी प्रकृति की देख शृंगार सखी। तेरे हृदय के गहरे सागर में हंसो का…
दिलों को दिलों से जोड़ें-अर्चना गुप्ता
दिलों को दिलों से जोड़ें दिलों से दिलों को जोड़े हम मीत गुनगुना लें मिल एक मधुर संगीत जीवन सरिता एक निधि अमूल्य एकदूजे संग सदा ही निभाएँ प्रीत अब…
हँसिए और हँसाइए-अपराजिता कुमारी
हँसिए और हँसाइए हर चेहरे की नूर है हँसी कभी चुपके से मुस्कुराती कभी खिलखिला कर हँसती, हँसी जीने की वजह बन जाती, हँसी दर्द भुलाने की दवा बन जाती,…
खुद पर भरोसा-आँचल शरण
खुद पर भरोसा रख खुद पर तू भरोसा जीवन खुद चमक जायेगा। है आसमां में भी न इतनी ताकत जो तेरा हौंसला नाप पायेगा। बस जरूरत है सच्चे लगन और…
पानी की बर्बादी रोको-विजय सिंह नीलकण्ठ
पानी की बर्बादी रोको पानी की बर्बादी रोको बर्बाद करे जो उसको टोको जल स्रोतों को ध्यान से देखो कूड़े कचरे न इसमें फेंको। जल से ही जीवन संभव है…
माँ-संयुक्ता कुमारी
माँ माँ की स्नेह गाथा मैं क्या खोलूँ । माँ की करुणा पर क्या बोलूँ ।। माँ कैसी भूलूँ वह मीठी यादें । कैसे भूलूँ वह प्यारी साथे । आपकी…
बैठा पंछी एक डाल पर-स्वाति सौरभ
बैठा पंछी एक डाल कर मिला मुझे रास्ते में, बैठा पंछी एक डाल पर। बना रहा था घोसला, तिनका तिनका जोड़कर।। आयी तेज आंधी और, तिनके बिखर गए जमीं पर।…
भिक्षुक-रीना कुमारी
भिक्षुक देखो बच्चो भिक्षुक आया, दरवाजा उसने खटखटाया, मैले-कूचे कपडों में आया, मनही मन जैसे भरमाया, सब दिखाये उसपर माया, देखो बच्चो भिक्षुक आया। झोली उसकी फटी-चिटी, आँखें उसकी धसी-धसी,…
माँ-प्रियंका कुमारी
माँ छोटा सा शब्द है “माँ” पर इसका न कोई मोल है यह तो वह होती हैं जो दुनियाँ में सबसे अनमोल है। माँ शब्द में छुपा हुआ वह शक्ति…