Site icon पद्यपंकज

शिक्षक दिवस : गौरव का शिखर – उमेश कुमार सिन्हा 

Umesh Kumar Sinha

Umesh Kumar Sinha

शिक्षक दिवस : गौरव का शिखर – उमेश कुमार सिन्हा 

पाँच सितंबर—शिक्षक दिवस,
प्रथम उपराष्ट्रपति, द्वितीय राष्ट्रपति
स्वर्गीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस।

पुण्य हृदय के संस्कार-कर्म,
शिक्षा-ज्योति जगाने के कर्म
स्वयं ही बोल उठे;
राष्ट्र में शिक्षा की संस्था के निर्माण में
जिनका रहा महत्त्वपूर्ण योगदान,
जिनके सान्निध्य से
विद्यार्थी और अध्यापक में
चेतना का संचार हुआ।

उनके कर्मों ने लोगों के
स्मृति-पटल पर स्थान बनाया,
बोल पड़ी जनता की वाणी—
“हम आपका जन्मदिन मनाएँगे।”

पर उस देवतुल्य व्यक्तित्व की
उच्च सोच और विचार ने
शिक्षक के कर्म को दृष्टि में लाया।
अपने जन्मदिवस को
शिक्षकों के सम्मान से जोड़कर
उन्होंने शिक्षक के गौरव को
नया आयाम दिया।

राष्ट्रपति ने शिक्षकों को सम्मान दिया,
जग में देश के भविष्य-निर्माण में
शिक्षक के योगदान को स्थान दिया।
यह गौरव की बात हुई
समूचे शिक्षक समुदाय की,
जो तन-मन-विद्या और नेक संस्कारों से
विद्यार्थियों को विभूषित करता है।

उसे यह सम्मान
भला कौन रोक सकता है जग में,
जो राष्ट्र के भविष्य को
ज्ञान की ज्योति से प्रकाशित करता है?

शिशु हो, किशोर हो या प्रौढ़,
जब भी संशय उत्पन्न होता,
ज्ञान-ज्योति का प्रकाशवाहक शिक्षक
जीवन-पथ के अँधियारों में
शिक्षा का प्रकाश दिखाता।

पथभ्रष्ट न हो मेरा किशोर,
दायित्व-धर्म का बोध कराता;
शिशु के अश्रु-भरे नयनों में
सफलता का आश्वासन भरता—
देता ही देता है शिक्षक।

तत्त्वज्ञान की पोटली खोलकर
शिष्य के मन को ज्ञान से भरता,
अज्ञान का तम दूर भगाकर
जीवन को उजियारा करता।

शिक्षा से जीवन सँवरता,
ज्ञान से विवेक निखरता,
कला से प्रतिभा चमकती,
नेक संस्कारों से व्यक्तित्व सँवरता।

देश और राष्ट्र के भविष्य का
योग्य प्रतिनिधि बनाता शिक्षक,
कर्तव्य और दायित्व का बोध कराता,
जीवन को सही दिशा दिखाता शिक्षक।

आज फिर शिक्षक दिवस आया है,
विद्यार्थियों और शिक्षक-गण में
नया उत्साह लाया है।

अमर रहे उनका नाम,
जो भूले-भटके को
सही मार्ग प्रशस्त करते हैं;
विद्या से विहीन जो शरण में आए,
उन्हें ज्ञान-विद्या से विभूषित करते हैं।

ज्ञान-ज्योति का दीप जलाकर
अज्ञान-तम को दूर भगाते हैं—
शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं,
जीवन जीने की कला सिखाते हैं।

नमन है उस शिक्षक को,
जो स्वयं जलकर भी
दूसरों का जीवन प्रकाशित करता है।

स्वरचित, रचनाकार :-
उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक
डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर
अंचल- ब्रह्मपुर, जिला – बक्सर

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version