है पुरुष वही सच्चा जिसमे , पुरुषार्थ भरा हो तन – मन मे । जीवन जीता हो परहित में ,[...]
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मानव दर्शन – अमरनाथ त्रिवेदीमानव दर्शन – अमरनाथ त्रिवेदी
मानव जीवन से नित आस यही , मिटे भ्रम , भय , कुशिक्षा । सुसंस्कार समाहित हो जग में ,[...]
नशा मुक्ति- अमरनाथ त्रिवेदीनशा मुक्ति- अमरनाथ त्रिवेदी
नशा सेवन करने से , कितने घर बर्बाद हुए ? शत्रु जिसको समझा आपने , उसके घर आबाद हुए ।[...]
फूल बनूँ- अमरनाथ त्रिवेदीफूल बनूँ- अमरनाथ त्रिवेदी
फूल बनूँ ; काँटें न बनूँ , सबके मन का मीत बनूँ । रगड़ा नही किसी जन से हो ,[...]
गुण – अवगुण- अमरनाथ त्रिवेदीगुण – अवगुण- अमरनाथ त्रिवेदी
गुण -अवगुण धर्मिता को , प्रकृति भी वरण करती है । जहाँ प्रकृति सृजन है करती , विनाश बीज भी[...]
नारी व्यथा- अमरनाथ त्रिवेदीनारी व्यथा- अमरनाथ त्रिवेदी
आज के भटकते समाज मे , नारी की स्थिति क्या होती है ? दिन -रात निज कर्म में रह ,[...]
सर्दियों में -अमरनाथ त्रिवेदीसर्दियों में -अमरनाथ त्रिवेदी
इन सर्दियों में ,गरीबों की रौनक रसहीन हो जाती है । सर्द थपेड़ों से जीना मुहाल हो जाती है ।[...]
कर्त्तव्य- अमरनाथ त्रिवेदीकर्त्तव्य- अमरनाथ त्रिवेदी
देव -दृष्टि का स्वपुँज , कर में लिए क्यों फिरते हो ? संतप्त हो या अभिशप्त अभी , कुछ क्यों[...]
उलझन -अमरनाथ त्रिवेदीउलझन -अमरनाथ त्रिवेदी
तन की पीड़ा भूल चुका पर , मन की पीड़ा भुला न पाया । सेवा अवसर आने पर भी ,[...]
लौहपुरुष -अमरनाथ त्रिवेदीलौहपुरुष -अमरनाथ त्रिवेदी
जिन्दगी के पुरुषार्थ को , यथार्थ से जाना उन्हें । उस मानवी काया को , सबने लौहपुरुष माना जिन्हें ।[...]
