उसके सपने मेरे सपने बड़े जतन किये समझने के उसकी तोतली जुबान को शब्द सा कुछ नहीं अर्थ सा कुछ नहीं एक लय! लय सा है फिर भी चलता लुढ़कता…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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