एक वृक्ष की करुण व्यथा छोटा सा मैं नन्हा पौधा, सड़क किनारे पनप रहा था। आते जाते मुसाफिरों को देख देख घबड़ा जाता था कुचल न दे कोई मुझको सोच…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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