ऊँ कृष्णाय नमः विधा:-रूपघनाक्षरी। विषय:-शृंगार। उठती हैं सागर में, तरंगें हजारों बार, सिन्धु करे जल राशि,से शृंगार बार-बार। केवट है[...]
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रूपघनाक्षरी – एस.के.पूनमरूपघनाक्षरी – एस.के.पूनम
गरजे बरसे मेघ, गगन वितान सेंघ, टप टप करे शोर,रात जाग होए भोर। आलस्य का जकड़न, अंग-अंग अकड़न, मंदिरों में[...]
रूपघनाक्षरी – एस.के.पूनमरूपघनाक्षरी – एस.के.पूनम
पर्वतों के पीछे छुपे, बादलों के ओट खुले, मंडराते चहूंओर,सलिल से भरपूर। लेकर तपीश चले, लुकाछिपी रवि खेले, घेर लेते[...]
दहेज – एस.के.पूनमदहेज – एस.के.पूनम
नन्ही परी आज आई, घर में खुशियां लाई, आँगन में किलकारी,गूंज रही सरेआम। नूतन विचारों संग, छू ली आसमानी रंग,[...]
रुपघनाक्षरी – एस.के.पूनमरुपघनाक्षरी – एस.के.पूनम
सरयू के तट पर, सीताराम बैठ कर, मांझी की प्रतीक्षा कर,भक्तों का बढ़ाये मान। थाल में निर्मल जल, दृगों से[...]
