Tag: एस.के.पूनम

S K punam

कृष्ण को प्रणाम है-एस.के.पूनमकृष्ण को प्रणाम है-एस.के.पूनम

0 Comments 9:07 pm

मनहरण घनाक्षरी पुकारीं दुलारी राधा,ढूंढ़ती फिरती कान्हा, नयन निहारी राह,पूछी कहाँ श्याम हैं। मुकुट शोभित भाल,बाँहों पर भुजबंध, कंठमाला मोतियों[...]

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किसान-एस.के.पूनमकिसान-एस.के.पूनम

0 Comments 8:32 pm

रश्मियां निकल आईं,पूरब में लोहित छाईं, कृषक तराने गाएं,अभी प्रातःकाल है। निकला विस्तर छोड़,देखा खेत-खलिहान, किसानों का मुखड़ा भी,देख खुशहाल[...]

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मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

0 Comments 9:41 pm

छंद:-मनहरण घनाक्षरी “सियाराम” पहनते पीताम्बर,सियाराम साथ-साथ, भोर उठे साथ चले,प्रीतम का प्रीत है। हाथ पकड़े सिया का,कभी न अलग हुआ,[...]

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मनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी- एस.के.पूनम

0 Comments 9:17 pm

सजी-धजी है वादियां,रंग-बिरंगे फूलों से, गुलाबों की पंखुड़ियां,बिखेरी सुगंध है। देव उतरे बागों में,शीश झुकाए खड़े हैं, भींगी-भींगी अँखियाँ,खुशियाँ अगाध[...]

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मनहरण घनाक्षरी:-“भोर”(खण्ड-1)- एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी:-“भोर”(खण्ड-1)- एस.के.पूनम

0 Comments 8:47 pm

मनहरण घनाक्षरी:-“भोर”(खण्ड-1) भोर ने बुलाया जब,रवि दौड़ा आया तब, मिटा अंधकार सब,बुलाने में हित है। खाट छोड़ दिया तब,उजियारा हुआ[...]

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घनाक्षरी”मेरी कामना” – एस.के.पूनमघनाक्षरी”मेरी कामना” – एस.के.पूनम

0 Comments 7:45 pm

जाग कर प्रातःकाल,निकलूँ अकेले राह, मेरे दोनों चक्षुओं में,भरे कई रंग हैं। मृदुल झंकार सुन,नव अनुराग चुन, मन पुलकित होता,[...]

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हल्का हो गया बस्ता – एस.के.पूनमहल्का हो गया बस्ता – एस.के.पूनम

0 Comments 9:09 pm

रात्रि-पहर जल्दी से सो जाता था, बोझिल मन से प्रातः उठ जाता था, सहम जाता बस्ते का बोझ उठाने से,[...]

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पार्थ- एस.के.पूनमपार्थ- एस.के.पूनम

0 Comments 8:28 pm

हे आचार्य तुम ही पार्थ हो” हे पार्थ!तेरा कर्मभूमि विद्यालय है, हे आचार्य!रणभूमि भी शिक्षालय है, लेखनी और किताबें तेरा[...]

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