करवा चौथ व्रत करती हूँ मैं उनकी पूजा, मेरे भगवान कोई और न दूजा। पति परमेश्वर से है प्यार अपार, खड़ी हूँ करके सोलह श्रृंगार। ढँक कर पूरे दैहिक परत…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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