कर्म ही पूजा है स्नेह सरसता है जीवन, वात्सल्य भरा हमसब का मन, पारिज़ात पुष्प बन कर महको, फकत प्रेम से सींचो हर क्षण। शुभ मंतव्य रखो मन में, सच्ची…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- अश्रु आंखों में लिए-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
- कहे ऋतुराज अपनों से-एस.के.पूनम
- बाल शोषण-राम किशोर पाठक
- अपना लक्ष्य-राम किशोर पाठक
- आमंत्रण पुष्प ब्यूटी कुमारी
- तीसवां दिन जनवरी के रामपाल प्रसाद सिंह
- युवा संकल्प कार्तिक कुमार
- सूर्य रश्मियाँ रामकिशोर पाठक
- स्वतंत्रता की चिंगारी जैनेंद्र प्रसाद
- छा गया मधुमास- रामकिशोर पाठक