भूलकर भेदभाव,दिल में हो समभाव, जीभ पर रहे सुधा,प्रेम रस पीजिए। होठों पर मुस्कान हो,गम का न निशान हो, मीठे बोल बोलकर, सुख सदा दीजिए। जीवन में हो उमंग,चाह का…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
- तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
- देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
- फाग-राम किशोर पाठक
- फाग क्या होती अम्मा बोल-राम किशोर पाठक
- बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी
- गर्मी आई -नीतू रानी
- सामाजिक न्याय _रामकिशोर पाठक
- पैगाम – राम किशोर पाठक
- भरे हुए भंडार समय पर लूटो-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’