भूलकर भेदभाव,दिल में हो समभाव, जीभ पर रहे सुधा,प्रेम रस पीजिए। होठों पर मुस्कान हो,गम का न निशान हो, मीठे बोल बोलकर, सुख सदा दीजिए। जीवन में हो उमंग,चाह का…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- Primary Teacher
- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
- विश्व हिंदी दिवस – राम किशोर पाठक
- बाल विवाह: एक अभिशाप – भवानंद सिंह
- मेरी बेटी – सुमन सौरभ
- बाल अभिलाषा – अमितेश कुमार (मलिकौरिया)
- मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नमन मंच – नीतू रानी
- सावित्री बाई फुले – सुमन सौरभ
- कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
- स्वास्थ्य – बैकुंठ बिहारी