हिंदी हिन्द की आवाज, प्राकृत, पाली, संस्कृत से क्रमशः निःसृत, भारतीयता की पहचान हिंदी। भारतेंदु से पंत तक,[...]
Tag: गिरिधर कुमार
लक्ष्य के ही गिर्द-गिरिधर कुमारलक्ष्य के ही गिर्द-गिरिधर कुमार
तो क्या हुआ? जो हार गया मैं! अब भी मैं यहीं खड़ा हूँ, पूरे दम खम से, यहीं, यहीं, लक्ष्य[...]
हिंदी मेरी हिंदी-गिरिधर कुमारहिंदी मेरी हिंदी-गिरिधर कुमार
आओ आज के दिन कुछ इतना कर लेते हैं हिंदी दिवस! का स्वागतम मन प्राणों से करते हैं! आओ करें[...]
आत्मलय-गिरिधर कुमारआत्मलय-गिरिधर कुमार
देखता हूँ गौर से क्षितिज के पास लेकिन सम्मुख सा सभी कुछ के साथ स्वयं की प्रतीति ऊहापोह और विश्रांतता[...]
भागेगा कोरोना-गिरिधर कुमारभागेगा कोरोना-गिरिधर कुमार
भागेगा कोरोना! अगर ठान लो, मन्त्र यह तुम अगर जान लो। यह कोई बड़ी बात नहीं, तुम भी कर सकते[...]
राखी-गिरिधर कुमारराखी-गिरिधर कुमार
स्नेहसिक्त प्रेम अमोल यह बन्धन प्यारा बस अनमोल भीगी आंखें हैं बहना की भाई मूक विह्वल है यह पावन पुनीत[...]
देश मेरा देश-गिरिधर कुमारदेश मेरा देश-गिरिधर कुमार
देश मेरा देश मेरा प्यार मेरा देश यह मान है सम्मान है श्रद्धा है अरमान है सारी दुनिया[...]
विश्व स्तनपान सप्ताह-गिरिधर कुमारविश्व स्तनपान सप्ताह-गिरिधर कुमार
समझ रही है दुनिया अब मां की शाश्वत ममता को जो अमृत है जीवनदायी, उस स्निग्ध सरिता को… मात्र पोषण[...]
पैबन्द लगी कविता-गिरिधर कुमारपैबन्द लगी कविता-गिरिधर कुमार
हजार पैबन्द लगी चिथड़े चिथड़े से बुनी बनी टुकड़ों में बुदबुदाती कविता… रास्ते के उदास मील के पत्थर की[...]
आज की कविता-गिरिधर कुमारआज की कविता-गिरिधर कुमार
आज की कविता संकोच कुछ नहीं है अब कहने में की हारने लगी है कविता कि मेरी कविता अब म्लान[...]
