विश्व स्तनपान सप्ताह-गिरिधर कुमार

Giridhar

Giridhar
समझ रही है
दुनिया अब
मां की शाश्वत
ममता को
जो अमृत है
जीवनदायी,
उस स्निग्ध सरिता को…

मात्र पोषण का
हेतु नहीं
बढ़कर है इस से
स्तनपान,
वात्सल्य की स्नेह घूँट से
बढ़ता है बल, शौर्य विधान

जननी का
आशीर्वाद प्रथम
जब शिशु ग्रहण कर पाता है
पालने में
अनायास ही
मां मां का कलरव
गाता है!

प्रकृति का अद्भुत
मेल है यह
बालक और उसकी
ममता का
प्रदान सुधा अमृत रस का
जीवन के
नियंता का…

विज्ञान चाहे
जितना आगे
यह मूल ज्ञान
सबसे बढ़कर है
मां! जननी तू ही
जीवनदात्री!
आज गूंजता बस
यह स्वर है!

विकल्प नहीं
इस अमृत का
जीवन का प्रथम
आहार है यह,
पहला आखर
मानवता का,
श्रद्धा यही,
विश्वास है यह!

गिरिधर कुमार

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टीचर्स ऑफ बिहार के पद्यपंकज

Vijay Bahdur Singh

टीचर्स ऑफ बिहार के पद्यपंकज, गद्यगुंजन और ब्लॉग टीम लीडर विजय बहादुर सिंह आपका स्वागत करता है। पद्यपंकज, गद्यगुंजन के रचना का सत्यापन श्री विजय बहादुर सिंह जी के द्वारा की जाती है।


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