जीवन की चुनौतियाँ देखकर चुनौतियों का सागर, पार करना है मुझे। गिरकर, संभलकर और फिर उठकर, कर्मपथ पर चलना है मुझे। कठिनाइयों से हो परिचित, विचलित न होना है मुझे।…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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