डमरू वाला रूप सुहावन ऐसा देखा “डमरू वाला” जैसा देखा कर त्रिशूल गले में नाग प्रस्फुटित अंग भी लगाए आग तीनों लोक में इसकी शान ऐसे हैं इनकी पहचान दु:ख…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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