धरती का मान बढ़ाएंगे – विधा: गीत(१६-१६) जन्म लिए हैं दिव्य भूमि पर धरती का मान बढ़ाएँगे। रंग-बिरंगे फूल खिलाकर,[...]
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योग – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’योग – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
शेक्सपियर सानेट शैली देह का मन से मिलन करिए। प्रभु से नाता मन से जोड़ें। धैर्य नियम को प्रतिदिन धरिए[...]
प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रेम दिव्य अनुभूति परम है आओ हम विश्वास बढ़ाएँ। प्रेम मग्न हों प्रभु को भजकर, अंतर्मन नव भाव जगाएँ। प्रेम[...]
दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
पिता विटप की छाँव है, देता शिशु आराम। रोटी कपड़ा गेह भी, सुखद सृष्टि आयाम।। पिता शांति का दूत है,[...]
शेक्सपियर सानेट शैली – देव कांत मिश्र ‘दिव्यशेक्सपियर सानेट शैली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य
पिता उम्मीद एक आस है। संतानों की दिव्य पहचान। परिवार अटूट विश्वास है। स्वाभिमान तो कभी अभिमान। कभी पिता निज[...]
मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रातः हम जग जाएँ, शीतल समीर पाएँ, प्राची की लालिमा देख, कदम बढ़ाइए। हरे-भरे तरु प्यारे, लगते सलोने न्यारे, इनके[...]
दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
श्रमिक दिवस पर हम सभी, करें श्रमिक-सम्मान। श्रम की निष्ठा में निहित, नवल शक्ति पहचान।। श्रम को जीवन धारिए, करिए[...]
विधा: कुंडलिया – देव कांत मिश्र ‘दिव्यविधा: कुंडलिया – देव कांत मिश्र ‘दिव्य
आओ मिलकर हम सभी, करें श्रमिक सम्मान। श्रम की निष्ठा में निहित, नवल शक्ति पहचान।। नवल शक्ति पहचान, दिव्य आँखों[...]
दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्यदोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य
करिए वंदन शंभु का, लेकर पूजन थाल। उनकी महिमा है बड़ी, उनका हृदय विशाल।। शिव के पावन नाम का, गाएँ[...]
हे स्वर की देवी माँ – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’हे स्वर की देवी माँ – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
हे स्वर की देवी माँ, वाणी मधुरिम कर दो। मैं दर पर आया हूँ, शुचि ज्ञान सुमति वर दो।। इंदीवर[...]
