नन्ही गोरैया ओ री चिरैया नन्ही गोरैया आ जा री वापस पड़ती हूँ पैंया। उड़-उड़ के आना जी भर के खाना दूँगी कटोरी भर पानी मुट्ठी भर दाना । अपना…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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