नारी तु नारायणी नारी तुम्हीं त्यागमूर्ति, तुम्हीं नारायणी हो, तुम्हीं दूर्गा, तुम्हीं देवी कत्यायनी हो। तुम्हीं अम्बे, तुम्हीं जगत महरानी हो, तुम्हीं दुःख भंजनी, तुम्ही तो कष्टहारिणी हो, तुम्ही सृष्टिरचिता,…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- हरि वामन बन आए-राम किशोर पाठक
- मानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठक
- चैत्र पावन मास है-राम किशोर पाठक
- परीक्षा-नैना कुमारी
- वामन अवतार- राम किशोर पाठक
- अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक
- कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक
- अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक
- गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा
- कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक