नारी तु नारायणी नारी तुम्हीं त्यागमूर्ति, तुम्हीं नारायणी हो, तुम्हीं दूर्गा, तुम्हीं देवी कत्यायनी हो। तुम्हीं अम्बे, तुम्हीं जगत महरानी हो, तुम्हीं दुःख भंजनी, तुम्ही तो कष्टहारिणी हो, तुम्ही सृष्टिरचिता,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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