संकट के बादल जब छाए, वीरों ने हुँकार लगाया। दुश्मन के सीने पर हमने , हर बार तिरंगा लहराया।। याद[...]
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निश्छल बंधन-नितेश आनन्दनिश्छल बंधन-नितेश आनन्द
निश्छल बंधन अतुलनीय है प्रकृति जिसकी, मिली है उसकी छांव हमें, बिन बंधनों के साथ चला मैं, मिल जाए कहीं[...]
ममता के आंचल में शिक्षा-नितेश आनन्दममता के आंचल में शिक्षा-नितेश आनन्द
ममता के आंचल में शिक्षा जन्मदात्री तो नहीं तुम, लेकिन मां का प्यार दिया है तूने। नन्ही कदमों से जरूर[...]
पहला पग-नितेश आनन्दपहला पग-नितेश आनन्द
पहला पग आया तो था खाली हाथ हीं वो, लेकिन उम्मीदों से भरा पड़ा था वो। एक सिकन जरूर थी[...]
