पग-पग आगे बढ़ना होगा गुरु शिखर पर चढ़ाना हो तो चट्टानों से टकराना होगा । सिंधु पार जाना हो तो लहरों से भी लड़ना होगा। जीवन में कुछ करना है…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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