नादान मानव प्रकृति मॉं ने कितना समझाया, सतर्क ,सावधान किया, न माना मानव, तो डराया, धमकाया, पर नादान मानव! जिद पर अड़ा हुआ है, चाँद पाने की ख्वाहिश में, धरती…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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