पिता का चरित्र एक रिश्ता है वो प्यार का, रहकर भी साथ निभा जाते हैं। होंठो पर दिखा मुस्कान वह हरदम, दिलों पर बोझ सहन कर जाते हैं। पता ही…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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