मत बाँधों मेरे पंखों को – बिंदु अग्रवाल

मत बाँधों मेरे पंखों को – बिंदु अग्रवाल   मत बाँधों मेरे पँखों को, मुझे उन्मुक्त गगन में उड़ने दो। अभी जरा बचपन है बाकी, मदमस्त पवन सी बहने दो।…

निःशब्द सौंदर्य – बिंदु अग्रवाल

वह अनुपम अद्वितीय यौवना सिर पर पत्थरों का भार लिए एक हाथ से अपने आँचल को संभालती। हिरनी सी सजल आँखे उसकी विवशता को दर्शाती, सजने सँवरने के दिन, नैन…