आज अपनी धरती को दुल्हन बनाऊँ कोशिश यही कि तेरी स्वतंत्रता बरकरार रहे, गगन के तले तिरंगा ध्वज, यूँ ही लहराते रहे, वतन के लिए जान, जरूरत पड़ने पर दे…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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