होली तेरे संग चले हर एक कली जब बोल उठे, मादक मंजर रस टपके, कोयल कूके तन तरसे, बाग की[...]
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होली- मनोज कुमारहोली- मनोज कुमार
🪂होली ना कहीं पे गम है, सम भाव सबरंग है; हरिभजन का दम है, तो ढोल-नाल का बम है। 👻होली[...]
देवों के देव महादेव- मनोज कुमारदेवों के देव महादेव- मनोज कुमार
यूं ही ना कहते हम देवों के देव महादेव कर्म पथ पर हर पल अग्रसर, विराम का ना कोई चिंतन,[...]
जीवन धारा – मनोज कुमारजीवन धारा – मनोज कुमार
वृक्षों की पत्ती जब धरा पर गिरती है, जीवन की धारा को यूँ कहां छोड़ती है। सूर्य की प्रभा से[...]
मकर संक्रांति-मनोज कुमारमकर संक्रांति-मनोज कुमार
मकर संक्रांति सही में, इ गजबे परब है। ठंडा को ठोककर, सुबह में उठना, निप पोत ठीककर, डुबकी लगाना। कमाया[...]
