माँ भारती का साधक : माखनलाल चतुर्वेदी कलम नहीं थी उनकी केवल,ज्वाला थी अंगार बनी।शब्दों में राष्ट्र धड़कता था,भारत माँ साकार बनी।। न भय लिखा, न दास्यता,न झुकी कभी उनकी…
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मां भारती-अशोक कुमार
मां भारती मां भारती कर्म भूमि तेरी, निर्मल धारा पवन करे फेरी। गंगा के अविरल धाराओं ने, कष्टों का निवारण करें मेरी।। तेरी गोद में बहती गंगा, सबका जीवन है…