मैं एक पुस्तक हूँ मैं एक पुस्तक हूँ। मैं दया, धर्म, भाव का एक बीड़ा हूँ, जो मुझमें समा जाय वह शेष मात्र नहीं। हर संकट, सरस, समागम, खोज समर्थन…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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