मैं एक शिक्षक हूँ छड़ी खूब दिए होंगे तन मन पर, नींद न मुझे, न तुम्हें उस रोज आई होगी, मन ही मन मुझको शत्रु माना होगा तुमने सोचो मेरी…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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