बाल-विवाह – रत्ना प्रिया ब्याह नहीं कोमल कलियों का फूलों-सा खिल जाने दो, बचपन, शिक्षा और यौवन को, मंजिल तो मिल जाने दो। वरदानरूप मिला यह जीवन, बने यह अभिशाप…
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शिक्षक – रत्ना प्रिया
शिक्षक अशिक्षित को जो शिक्षित कर दे, ज्ञान से तम को हर ले, दृढ. आशा की किरण देकर, सुपथ पर ले जाते हैं। वह शिक्षक कहलाते हैं। शिक्षक दिनकर-सा…
मंजूषा कला – रत्ना प्रिया
मंजूषा कला लोक कथा, लोक संस्कृति, जीवन का आधार है , मंजूषा कला ,अंगप्रदेश का, अनुपम उपहार है | कला जीवन की थाती है, स्नेहघृत की बाती है, प्रतिपल आकर्षित…